उन्होंने कहा कि 384 KAS अधिकारियों की भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा के पुन: आयोजन पर फैसला कर्नाटक प्रशासनिक न्यायाधिकरण (KAT) के फैसले के बाद लिया जाएगा।
घटना के मुख्य बिंदु:
- मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में KAS परीक्षा को लेकर हुई बहस के दौरान अपनी सफाई दी।
- उन्होंने बताया कि दिसंबर 2024 में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) द्वारा पुनः परीक्षा आयोजित की गई थी।
- परीक्षा के प्रश्नपत्रों के अंग्रेजी से कन्नड़ में अनुवाद में कई गलतियां पाई गईं।
- इस कारण उम्मीदवारों और विपक्षी दलों ने परीक्षा को फिर से कराने की मांग उठाई।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि KPSC एक संवैधानिक संस्था है, इसलिए सरकार परीक्षा दोबारा आयोजित करने का आदेश नहीं दे सकती।
- कुछ उम्मीदवारों ने इस मामले में KAT का दरवाजा खटखटाया है।
- KAT इस मामले में 13 मार्च को अपना फैसला सुनाएगा।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर KAT परीक्षा के पुन: आयोजन का आदेश देता है, तो सरकार इसमें कोई बाधा नहीं डालेगी।
- यदि KAT परीक्षा फिर से कराने का आदेश नहीं देता है, तो मुख्यमंत्री विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे।
- विपक्षी दल भाजपा ने इस मामले को लेकर विधानसभा में सरकार को घेरा था।
- भाजपा ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी के चलते सैकड़ों उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर लग गया है।
- उम्मीदवारों ने सरकार से परीक्षा फिर से कराने की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किया था।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार उम्मीदवारों के हितों को प्राथमिकता देगी।
- KAT के फैसले के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
- KPSC पर लगातार परीक्षा में त्रुटियां होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
- मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में इस तरह की गलतियां न हों।
- परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
- उम्मीदवार KAT के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
- सरकार ने भरोसा दिया है कि अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर उचित कदम उठाए जाएंगे।


