हजारीबाग-बरही राष्ट्रीय राजमार्ग पर पेड़ों की कटाई का मामला हाई कोर्ट पहुंचा है। अदालत ने इसे गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा माना है। विकास कार्यों में प्रकृति की अनदेखी पर सवाल उठे हैं। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। न्यायालय ने कहा कि विकास का मतलब विनाश नहीं होता। पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
सुनवाई के दौरान एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी अदालत में मौजूद रहे। अदालत ने पौधारोपण पर खर्च की पूरी जानकारी मांगी। अधिकारियों ने 20 हजार पौधे लगाए जाने की बात कही। इन पर 8 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने दावों पर संदेह जताया। सड़क किनारे हरियाली न दिखने की बात रखी गई।
कोर्ट ने कहा कि पुराने पेड़ों की जगह नए पौधे लगाना आसान काम नहीं है। यदि पौधे लगाए गए हैं तो उनकी देखभाल क्यों नहीं हुई। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही माना। सार्वजनिक धन का सही उपयोग होना चाहिए। पर्यावरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की गहन समीक्षा जारी है।

