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ट्रूडो ने गलत देश से लिया पंगा, यह पहले वाला भारत नहीं… अमेरिका को धोखेबाज क्यों बता रहे विशेषज्ञ

भारत और कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर राजनयिक तनाव चरम पर है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने दावा किया है कि निज्जर की हत्या में भारत के एजेंटों का हाथ है और उनके देश की सुरक्षा एजेंसियों के पास इसके सबूत भी हैं। हालांकि, भारत ने ट्रूडो के दावे को बेतुका बताते हुए खंडन किया है। भारत ने कनाडा से सबूत भी मांगे हैं, जो उसे अब तक नहीं मिले हैं। लेकिन, बाद में ट्रूडो ने दावा किया है कि कनाडा ने भारत के साथ सबूत को कई हफ्तों पहले ही शेयर कर दिया है। अब खुलासा हुआ है कि इस मामले में कनाडा को जो कथित सबूत मिले थे, उसे अमेरिका ने सौंपा था। इसका मतलब यह हुआ कि अमेरिका कनाडा में भारतीय राजनयिकों की जासूसी कर रहा था। एक मित्र देश के लिए दूसरे मित्र देशों के राजनयिकों की जासूसी करना सीमा को पार करने वाला मामला है। ऐसे में कूटनीति के कई बड़े विशेषज्ञों ने कनाडा और अमेरिका की आलोचना की है।

अमेरिका के कारण प्रभावित हो रहे भारत-कनाडा संबंध

जाने माने रणनीतिक विचारक, लेखक और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने कहा है कि भारत के साथ भू-राजनीतिक लड़ाई के लिए ट्रूडो को प्रोत्साहित करने में अमेरिकी खुफिया विभाग की भूमिका अमेरिकी-भारत संबंधों की दिशा पर असर डाल सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में आपसी विश्वास कायम करने का काम अब कठिन हो गया है। चेलानी के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि कनाडा और अमेरिका ने जासूसी की धुंधली दुनिया से उत्पन्न आरोपों के माध्यम से भारत के खिलाफ क्या हासिल करना चाहा है, जहां सूचना और दुष्प्रचार के बीच की रेखा आसानी से धुंधली हो जाती है। न तो ओटावा और न ही वाशिंगटन समर्थन में कोई वीडियो, ऑडियो या फोरेंसिक सबूत पेश करने को तैयार है। ऐसे में ये निराधार आरोप भारत को अपनी नई विदेश नीति पर पुनर्विचार करने के अलावा किसी भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर सकते हैं।

यह पहले का भारत नहीं, ट्रूडो ने की गलती

वहीं, पश्चिम की जियोपॉलिटिकल स्ट्रैटजिस्ट वेलिना चाकारोवा ने कहा कि जस्टिन ट्रूडो ने पूरी तरह से घरेलू कारणों से भारत के साथ गलत भू-राजनीतिक लड़ाई को चुना। इसका पहले ही काफी उलटा असर हो चुका है क्योंकि उन्हें लगा कि यह पिछले दशक का भारत है। ट्रूडो को प्रोत्साहित करने में अमेरिकी खुफिया विभाग की भूमिका का उल्टा असर होगा, क्योंकि रूस के साथ संबंधों और चीन पर प्रमुख क्षमताओं के कारण भारत को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। भारत को इंडो पैसिफिक में चीन का सामना करते समय अमेरिका की जितनी जरूरत है, उससे कहीं ज्यादा अमेरिका को चीन का सामना करते समय भारत की जरूरत है।

भारत के साथ दोतरफा गेम खेल रहा अमेरिका

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा को निज्जर हत्याकांड से जुड़ी खुफिया जानकारी अमेरिका ने दी थी। रिपोर्ट में लिखा गया कि इससे जुड़े अधिकारी ने कहा कि अमेरिका को इस साजिश से जुड़े सबूतों के बारे में तब तक पता नहीं चला, जब तक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या नहीं कर दी गई। हालांकि, कनाडा में अमेरिकी राजदूत डेविड कोहेन ने इस दावे का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि ‘फाइव आइज’ के साझेदारों के बीच इस मामले से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की गई थी, जिसने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को एक खालिस्तानी अलगाववादी की कनाडा की धरती पर हुई हत्या में भारतीय एजेंट के कथित तौर पर संलिप्त रहने का आरोप लगाने को प्रेरित किया।

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