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किसान दंपती ने खेत में 30 हजार खर्च कर लगाई यह सब्‍जी फिर लाखों कमाए, जानिए वो फॉर्मूला

ऐसे बहुत कम किसान हैं जिन्होंने पारंपरिक फसल के साथ-साथ सब्जियों की खेती की ओर रुख किया है। क्योंकि आजकल खेती-क‍िसानी को घाटे का सौदा कहा जाता है। हालांकि, बेहतर प्‍लान‍िंग और अच्छे मैनेजमेंट के साथ महाराष्‍ट्र के नांदेड ज‍िले के क‍िसान ने गजब कर द‍िया। ज‍िले के हदगांव तालुका के जांभाला गांव के एक छोटे किसान निरंजन सरकुंडे ने केवल डेढ़ बीघा भूमि में बैंगन लगाया और इसे तीन सालों तक उगाया। इससे उन्‍होंने लागत के अलावा चार लाख रुपये कमाए हैं।

​बैंगन को कितनी जमीन में लगाया?

इस किसान का नाम निरंजन सरकुंडे है। निरंजन के पास 5 एकड़ का खेत है। पहले सरकुंडे अपने खेत में पारंपरिक फसलें उगा रहे थे। हालांकि, उन्हें वह आमदनी नहीं मिल रही थी जो वे चाहते थे। इसके बाद उन्‍होंने डेढ़ बीघा खेत में बैंगन लगाया। निरंजन सरकुंडे ने अपनी पारंपरिक खेती के साथ-साथ सब्जियों की खेती भी शुरू की। यह देखकर कि पड़ोसी गांव ठाकरवाड़ी के किसानों का रुझान सब्जी की खेती की ओर बढ़ गया है क्योंकि इससे आमदनी खूब हो रही है। निरंजन सरकुंडे ने कुल 5 एकड़ खेत में से डेढ़ बीघा में बैंगन की खेती की।

​30 हजार खर्च, 3 लाख शुद्ध मुनाफा​

यह बैंगन दो बाई दो क्यारियों में लगाया गया था। चूंकि पानी की कमी है, इसलिए पानी बचाने के लिए ड्रिप का उपयोग करके उचित जल नियोजन किया गया। दो महीने में बैंगन की कटाई हो गई। और यह बैंगन उमरखेड़ और भोकर के आसपास के बाजारों में बेचा जाता है। इस डेढ़ बीघा जमीन में बैंगन उत्पादन से निरंजन सरकुंडे को लगभग 3 लाख की शुद्ध मुनाफा हुआ है। इस पर महज 30 हजार का खर्च आया है। सब्जी की खेती सस्ती होने के कारण जंभाला गांव के किसान अब सब्जी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।

​लोकल मार्केट में खूब है ड‍िमांड

छोटी जोत के किसान निरंजन सरकुंडे के बैंगन की लोकल मार्केट में अच्छी ड‍िमांड है। सरकुंडे ने कहा कि वे सब्जियों को अन्य स्थानों पर भेजने के बजाय लोकल मार्केट में बेचते हैं।

​किसानों का रुझान अब टमाटर की खेती की ओर बढ़ा

टमाटर की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। बाजार में टमाटर 150 से 180 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। इसलिए जिले में किसानों का रुझान अब टमाटर की खेती की ओर बढ़ा है। नांदेड़ जिले में किसान खरीप की बुआई के अलावा सब्जी की खेती में भी जुटे हुए हैं। टमाटर के दाम बढ़ने से अब किसानों को उम्मीद है कि टमाटर के उत्पादन से उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ मिलेगा।

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