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वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद.

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 25, 26, 29 और 300A का उल्लंघन करता है।

मुख्य बातें:
वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को संसद ने दोनों सदनों में बहस के बाद पारित किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “ऐतिहासिक कदम” बताया, जिससे मुस्लिम समुदाय के वंचित वर्ग को आवाज मिलेगी।

यह बिल सरकार को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अधिक अधिकार देता है।

कांग्रेस सांसद जावेद का दावा है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है।

अन्य धार्मिक ट्रस्टों जैसे हिंदू और सिख ट्रस्टों को स्व-नियमन की स्वतंत्रता है, लेकिन वक्फ संपत्तियों पर अधिक सरकारी नियंत्रण लगाया जा रहा है।

अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए इसे “स्पष्ट रूप से मनमाना” बताया गया।

नए कानून में वक्फ-बाय-यूजर (Waqf-by-User) की अवधारणा को हटाया गया है।

मोहम्मद जावेद खुद वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सदस्य रह चुके हैं।

याचिका में कहा गया है कि यह अधिनियम धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन करता है।

नए प्रावधानों के तहत, धार्मिक अभ्यास की अवधि के आधार पर वक्फ निर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया है।

हाल ही में इस्लाम अपनाने वाले व्यक्ति को वक्फ संपत्ति समर्पित करने का अधिकार नहीं मिलेगा, जिससे अनुच्छेद 15 का उल्लंघन होता है।

2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले (M Siddiq v Suresh Das) में वक्फ-बाय-यूजर को मान्यता दी गई थी, जिसे अब हटा दिया गया है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि वक्फ अधिनियम में किया गया बदलाव मुस्लिम समुदाय के लिए नुकसानदायक होगा।

2019 में ट्रिपल तलाक को खत्म करने के बाद, यह बीजेपी द्वारा मुस्लिम समुदाय से जुड़ा दूसरा बड़ा कानून बताया जा रहा है।

कांग्रेस का आरोप है कि यह बिल मुस्लिम संपत्तियों पर सरकार के हस्तक्षेप को बढ़ावा देगा।

याचिका में राज्य के अत्यधिक नियंत्रण को असंवैधानिक बताया गया है।

सरकार का पक्ष है कि यह कानून पारदर्शिता और न्यायोचित संपत्ति प्रबंधन को बढ़ावा देगा।

विपक्षी दलों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है।

मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है, और इस पर आगामी दिनों में सुनवाई हो सकती है।

यह विवाद राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर बड़ी बहस का रूप ले सकता है।

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