भारत में बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी सामाजिक चुनौती बन चुकी है। एनसीआरबी के आंकड़े इस सच्चाई को उजागर करते हैं। हजारों बच्चे हर साल लापता हो रहे हैं। वर्ष 2022 में यह संख्या एक लाख से अधिक रही। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
हालांकि पुलिस और प्रशासन द्वारा कई बच्चों को खोज निकाला गया। 80 हजार से ज्यादा बच्चे सुरक्षित घर लौटे। फिर भी हजारों बच्चे अब भी लापता हैं। इससे अपराध और तस्करी की आशंका बढ़ जाती है। विशेषज्ञ इसे सामाजिक विफलता मानते हैं।
झारखंड जैसे राज्यों में खतरा और अधिक है। ग्रामीण इलाकों में लड़कियां ज्यादा प्रभावित होती हैं। झूठे रोजगार और बेहतर जीवन का लालच दिया जाता है। सरकार ऑपरेशन मुस्कान जैसे अभियान चला रही है। फिर भी जागरूकता की जरूरत बनी हुई है।


