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गहलोत को हटाएं या पायलट पर कार्रवाई करें? राजस्थान में कांग्रेस के लिए आगे कुआं, पीछे खाई

राजस्थान में चुनाव सिर पर हैं। बमुश्किल 4-5 महीने ही बचे हैं लेकिन सत्ताधारी कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सीधे-सीधे सचिन पायलट के भरोसेमंद विधायकों पर बीजेपी से पैसे लेने का आरोप लगा रहे। उधर पायलट गहलोत की निष्ठा पर ही सवाल उठा रहे। अपनी ही सरकार के खिलाफ एक दिन का अनशन करने, प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद अब ‘नाउम्मीद’ पायलट पदयात्रा भी निकालने वाले हैं। तेवरों से साफ है कि पायलट अब आर-पार के मूड में हैं लेकिन कांग्रेस हाईकमान को कुछ करते नहीं सूझ रहा। राजस्थान के सियासी हालात पर हाईकमान की तरफ से एक टिप्पणी तक नहीं आई। कांग्रेस आलाकमान असमंजस में है लेकिन लंबे वक्त तक चुप्पी साध भी नहीं सकते। वक्त जो नहीं है क्योंकि चुनाव सिर पर है। आशंका गहरा रही है कि कांग्रेस के साथ कहीं राजस्थान में पंजाब की 2021 वाली कहानी न दोहरा जाए।

गहलोत बनाम पायलट
पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बिना किसी उकसावे के सचिन पायलट गुट के विधायकों पर हमला बोला। बिना नाम लिए। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और 2 अन्य बीजेपी नेताओं को इस बात के लिए शुक्रिया कहा कि उन्होंने 2020 में कांग्रेस के बागियों की मदद से उनकी सरकार गिराने की कोशिश का समर्थन नहीं किया। पायलट समर्थक विधायकों की तरफ इशारा करते हुए यहां तक दावा किया कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने उनकी सरकार गिराने के लिए बीजेपी से पैसे लिए। दूसरी तरफ, पायलट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीधे गहलोत पर पलटवार किया। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगता है कि गहलोत की नेता सोनिया गांधी नहीं, बल्कि वसुंधरा राजे हैं। पूर्व डेप्युटी सीएम ने विधायकों के पैसे लेने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा जो विधायक उनके साथ दिल्ली गए थे, वे सभी ईमानदार हैं और पार्टी के समर्पित नेता हैं।

आर-पार के मूड में सचिन पायलट
सचिन पायलट अब आर-पार के मूड में दिख रहे हैं। पार्टी आलाकमान से चेतावनी के बावजूद 11 अप्रैल को उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ एक दिन का धरना दिया था। अब भ्रष्टाचार के खिलाफ 11 मई से 5 दिवसीय पदयात्रा का ऐलान कर चुके हैं। उनकी ये पदयात्रा अजमेर से शुरू होकर जयपुर तक जाएगी। जब पिछले महीने पायलट ने एक दिन के धरने का ऐलान किया था तब कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह प्रभारी ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर वह ऐसा करते हैं तो इसे ‘पार्टी-विरोधी गतिविधि’ माना जाएगा। अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद पायलट ने धरना दिया। अब अशोक गहलोत ने पायलट कैंप के खिलाफ तीखा हमला बोला है लेकिन आलाकमान की तरफ से उस पर कोई बयान नहीं आया। ये बात पायलट और उनके समर्थक विधायकों को अखर रही है। यही वजह है कि मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पायलट गहलोत पर हमले को लेकर बहुत निर्मम दिखे और पदयात्रा का भी ऐलान कर दिया।

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