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‘मैं फिर से लौटूंगा’… देवेंद्र फडणवीस के बयान से टेंशन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गुट

जिस दिन से उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अचानक ‘मी पुन्हा येइन’ यानी ‘मैं फिर से लौटूंगा’ की बात कही है, बीजेपी के साथ सत्ता सुख भोग रही शिवसेना (शिंदे) के विधायक सकते में हैं। विधायकों के बीच यह चर्चा है कि देवेंद्र फडणवीस का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सुप्रीम कोर्ट से शिंदे के 16 विधायकों की पात्रता पर फैसला आने ही वाला है। शिंदे के विधायकों को लग रहा है कि फडणवीस का यह बयान शिंदे के मुख्यमंत्री पद से जाने का संकेत हैं। शिंदे के 16 विधायकों की पात्रता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में जो फैसला लंबित है, उस पर विधि विशेषज्ञों का कहना है फैसला दो ही तरह से हो सकता है। पहला यह कि सुप्रीम कोर्ट विधायकों की पात्रता और अपात्रता का फैसला करने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को दे दे। अगर, ऐसा फैसला आया, तो शिंदे सरकार को कोई खतरा नहीं है। क्योंकि, महाराष्ट्र विधानसभा में अध्यक्ष बीजेपी का है, तो वह इस फैसले को या तो लटकाए रख सकता है, या फिर सरकार के पक्ष में फैसला सुना सकता है। लेकिन, विधानसभा अध्यक्ष के पाले में गेंद डालने के बजाय सुप्रीम कोर्ट ने सीधे ही 16 विधायकों को अपात्र करार दे दिया, तो मामला उलझ सकता है। क्योंकि, जिन 16 विधायकों को पर पात्रता की तलवार लटकी है, उनमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी शामिल हैं।

अगर वह अपात्र कर दिए जाते हैं, तो उनके सामने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। अगर ऐसा हुआ, तो बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) युति की ही सही, लेकिन नई सरकार के लिए जो सारी प्रक्रिया होती है, वह पूरी करनी पड़ेगी। यानी नए सिरे से मुख्यमंत्री चुनना पड़ेगा। नए सिरे से सदन में विश्वास मत हासिल करना पड़ेगा और नए सिरे से सरकार की स्थापना करनी पड़ेगी।

शिंदे का ‘विदाई भोज’ तो नहीं था
शिंदे के विधायकों का अंदाजा है कि देवेंद्र फडणवीस ने इसी समीकरण को ध्यान में रखते हुए ‘मी पुन्हा येइन’ का राग अलाप सत्ता में लौटने संकेत दिया है। शिंदे के विधायक जानते हैं कि 16 लोगों के अपात्र घोषित होने के बावजूद सरकार का बहुमत कम नहीं होगा। हालांकि, तब मुख्यमंत्री उनका नहीं रहेगा और जब उनका मुख्यमंत्री नहीं रहेगा, तो जो भी सरकार बनेगी, उसमें उनकी स्थिति वैसी ही हो जाएगी, जैसे 2014 से 2019 के बीच में थी। उन्हें यह चिंता भी सता रही है कि अगर अजित पवार बीजेपी से मिल गए, तो उनका यह दावा झूठा साबित हो जाएगा कि वह एनसीपी के साथ सरकार बनाने के कारण उद्धव ठाकरे को छोड़कर बीजेपी के साथ आए थे। इसके अलावा पिछले दिनों मुख्यमंत्री जब राज्यपाल से मिलने गए, तो उन्होंने राज्यपाल के साथ डिनर किया था। उसी दिन से यह कयास भी लग रहे हैं कि कहीं यह शिंदे का ‘विदाई भोज’ तो नहीं था।

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