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32 विधायक, 9 मंत्री, महाराष्ट्र में अजित पवार गुट की बल्ले-बल्ले, सत्ता के लिए बीजेपी का समझौता या गठबंधन धर्म?

अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में ताजा सियासी हालातों पर सबकी नजर है। सरकार में बीजेपी के साथ शिवसेना और एनसीपी दोनों के बागी गुट शामिल हो गए हैं। फिलहाल समीकरण देखें तो सत्तारूढ़ गठबंधन महाविकास आघाड़ी के मुकाबले कहीं अधिक ताकतवर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि 48 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में बीजेपी जमकर ताकत झोंक रही है। हालांकि इसमें भी सबसे अधिक दिलचस्प यह है कि 105 सीटों वाली बीजेपी के कैबिनेट में मात्र 10 मंत्री ही हैं जबकि 42 विधायकों के समर्थन का दावा करने वाले अजित पवार गुट के 9 मंत्री शामिल हैं।

महाराष्ट्र कैबिनेट में फिलहाल 29 मंत्री बनाए जा चुके हैं जबकि मंत्रिमंडल की क्षमता 43 है। यानी अभी भी 14 पद खाली हैं। बीजेपी के कुल 105 विधायकों में से कैबिनेट में 10 मंत्री हैं। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) के कुल 40 विधायक हैं और कैबिनेट में बीजेपी के बराबर ही 10 मंत्री मौजूद हैं। इन दोनों के मुकाबले सबसे ज्यादा फायदे में अजित पवार गुट है जिसे 9 मंत्रीपद मिल चुके हैं जबकि मात्र 32 विधायकों के नाम ही सामने आए हैं और कुल 42 के समर्थन का दावा कर रहा है।

किसके कितने विधायक?
सवाल है कि 2024 की बिग पिक्चर से पहले महाराष्ट्र में सत्ता के लिए बीजेपी ने यहां समझौता किया है या फिर वाकई वह गठबंधन का धर्म निभा रही है। 288 विधानसभा वाले महाराष्ट्र में बीजेपी की 105 सीटें हैं जबकि शिंदे गुट के 40 विधायक और अजित पवार गुट के 32 विधायकों का समर्थन सरकार को हासिल है।अजित पवार गुट हालांकि 42 विधायकों का दावा कर रहा है लेकिन बैठक में 32 विधायक ही मौजूद थे। देखा जाए तो कुल मिलाकर 200 से अधिक विधायक सत्तारूढ़ के पक्ष में हैं।

अजित पवार के आने से खलबली
अजित पवार गुट के सरकार में शामिल होने के साथ ही उसके 9 मंत्रियों ने शपथ ली। इससे महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में हलचल तेज है। यह भी कहा गया कि अजित पवार के आने से बीजेपी और शिंदे गुट के कुछ विधायक नाराज हैं। वहीं एकनाथ शिंदे के सीएम पद से इस्तीफे की अफवाह भी उड़ने लगी। इस पर विराम लगाते हुए एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि अजित पवार के आने से कोई नाराजगी नहीं है बल्कि उनकी सरकार और मजबूत होगी।

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