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 ‘हुजूर दो शादी करके फंस गया हूं’, पूर्णिया में पति ने पत्नियों के लिए बांटा समय, जानिए अपने लिए रखे कितने दिन

बिहार के पूर्णिया जिले में रविवार यानी आज एक अजीब मामला पुलिस परिवार परामर्श केंद्र के सामने आया। उसके बाद पंचायत हुई। पंचायत में फैसला हुआ। अब पति अपने लिए 10 दिन का आवंटन पाकर खुश दिख रहा है। पूरी कहानी ऐसी है जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। पूर्णिया के पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में कुल 45 मामलों की सुनवाई हुई। जिसमें केंद्र की ओर से 11 मामलों का निस्तारण किया गया। 10 मामलों में परिवार को समझाया और उनका घर दोबारा बसाया गया। बाकी मामलों में शर्त के हिसाब से समझाया गया। उन्हीं में से एक मामला काफी अलग था।

अमौर थाना क्षेत्र का मामला

पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में जिले के अमौर थाना क्षेत्र के हलालपुर का एक मामला सामने आया। परामर्श केंद्र के सामने आकर पति ने कहा कि हुजूर दो शादी करके हम बुरी तरह फंस गए हैं। मैंने इन दोनों के साथ शादी करके अपने पैर पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली है। दोनों पत्नियों ने मेरा जीना मुश्किल कर दिया है। मैं सांस नहीं ले पाता हूं। मैं जी नहीं पाता हूं। मैं अपने मन के मुताबिक कुछ कर नहीं पाता हूं। हुजूर मुझे इंसाफ चाहिए। मुझे इस झंझट से छुटकारा दिलाइए। उसके बाद परामर्श केंद्र ने पूरे मामले का गहन अध्ययन किया।

10-10 दिन बांट दिया

केंद्र पर पति के साथ पहुंची पहली पत्नी ने कहा कि 10 साल शादी को हो गए सरकार। मुझे कोई बच्चा नहीं हुआ। मेरे पति ने मुझसे झूठ बोलकर दूसरी शादी कर ली। अब मुझे मेरा पति सिर्फ नमक भात भी खिलाएगा, तो मैं उसका साथ नहीं छोड़ूंगी। इस पर पति ने तपाक से कहा कि मुझे मेरा वंश बढ़ाना है। इसलिए मैंने दूसरी शादी की है। मैं नहीं जानता था कि दूसरी शादी करने का परिणाम ऐसा होगा। दोनों के झगड़े से मैं परेशान हो चुका हूं। मैं दोनों को रखना चाहता हूं लेकिन दोनों ठीक से नहीं रहती हैं। उसके बाद परामर्श केंद्र ने दोनों पत्नियों से पूछा कि आप लोग कैसे रहना चाहेंगी। उसके बाद पति ने कहा कि मैं वादा करता हूं एक पत्नी के साथ 10 दिन और दूसरी के साथ भी दस दिन रहूंगा। बाकी 10 दिन मैं अपनी जिंदगी जिउंगा।

मामला सुलझ गया

पति के इस सुझाव को परामर्श केंद्र ने आपसी सलाह से बेहतर माना। उसके बाद इस सुझाव पर दोनों पत्नियों ने भी सहमति जताई। उसके बाद वहां मौजूद पदाधिकारियों ने एक कागज तैयार किया। उसमें इस बात का जिक्र किया गया। जानकारी के मुताबिक केंद्र ने कहा कि जब अपने पैर में कुल्हाड़ी मार चुके हो तो तुम दोनों के साथ कैसे रहोगे ये तुम ही तय करो। मगर किसी प्रकार का विवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले को निपटाने में केंद्र की महिला संयोजक किरण बाला, स्थानीय अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक, और रविंद्र शाह के साथ जीनत रहमान और प्रमोद जायसवाल मौजूद रहे। इस समझौते में नारायण गुप्ता ने भी अहम भूमिका निभाई।

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