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इस बिहारी ने तो कमाल कर दिया, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट हैं इसके किराएदार, सिर्फ रेंट से कमा लेते हैं ₹769 करोड़​

कहते हैं कि अगर आप किसी काम को करने की ठान लें तो तमाम मुश्किलों के बाद भी सफलता जरूर हासिल होती है। बिहार के मिडिल क्लास परिवार से आने वाले बिजय अग्रवाल (Bijay Agrawal) ने कभी सोचा भी नहीं था कि 5000 रुपये की नौकरी करने वाले 5000 करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा कर लेंगे। बहनोई की दुकान से बिजनेस का गुर सीखने वाले बिजय अग्रवाल आज सिर्फ किराए से 769 करोड़ रुपये से अधिक कमा लेते हैं। हैदराबाद में उनकी एक बिल्डिंग का किराया प्रति महीने 4.14 करोड़ रुपये है।

​कौन हैं बिजय अग्रवाल​

सत्व ग्रुप (Sattva Group) के एमडी बिजय अग्रवाल बिहार के छोटे से शहर से ताल्लुक रखते हैं। वो बिहार के किशनगंज के रहने वाले हैं। उनके पिता साल 1965 में बंग्लादेश से भारत आए थे। पिता एक छोटा-मोटा कारोबार चलाते थे। बिजय 9 भाई-बहन के साथ किशनगंज में एक छोटे से घर में रहते थे। सुविधाएं सीमित थी, इसलिए बचपन कमियों के साथ बीता। बहन की शादी हुई तो वो उनके साथ राजीगंज, पश्चिम बंगाल चले गए। बहनोई दुकान चलाते थे। बिजय उसी दुकान में उनका हाथ बंटाते थे। उन्होंने इस दुकान से बिजनेस के गुर सीखें। बहनोई ने उन्हें मार्केटिंग से लेकर कस्टमर्स के साथ मोलभाव करने का तरीका सीखाया। 1985 में वो वहां से कोलकाता चले गए, जहां उन्होंने एक फाइनेंशियल कॉरपोरेशन कंपनी को ज्वाइन कर दिया। उनकी कंपनी बिल्डर्स के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का काम करती थी। यहां उन्होंने कंस्ट्रक्शन से जुड़ा काम सीखा।

​ऐसे शुरू की खुद की कंपनी

साल 1993 में अपने मेंटर जीडी सलारपुरिया के साथ मिलकर बेंगलुरु में अपना पहला प्रोजेक्ट शुरू किया। साल 2000 में उन्होंने छोटे-बड़े कई प्रोजेक्ट शुरू किए। यहां से उनकी तरक्की की कहानी शुरू हो गई। दोनों ने मिलकर कंपनी सलारपुरिया-सत्वा ग्रुप (Salarpuria-Sattva group) की शुरुआत की। साल 2021 में ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी कंपनी ने 55.4 करोड़ वर्गफीट का बिल्डरअप एरिया तैयार कर लिया। साल 2021 तक कंपनी का रेंटल इनकम 761 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

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