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हुड्डा और खट्टर दोनों के साथ, हरियाणा में जरूरी या मजबूरी, गोपाल कांडा की पॉलिटिक्स क्या है?

गीतिका शर्मा सुसाइड केस में हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल गोयल कांडा को दिल्ली की अदालत ने बरी कर दिया है। 11 साल बाद आए कोर्ट के फैसले से गोपाल कांडा को सियासी तौर पर फिलहाल संकट नहीं दिख रहा है। सजा होती तो उनकी विधायकी पर खतरा था। गोपाल कांडा के सियासी कद की बात करें तो कांग्रेस और बीजेपी दोनों के साथ उनकी नजदीकियां रही हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कांग्रेस सरकार में वह मंत्री बनते हैं तो मनोहर लाल खट्टर की सरकार को भी वह बाहर से समर्थन देते हैं। आखिर गोपाल कांडा की पॉलिटिक्स है क्या?जब किया बिना शर्त BJP के समर्थन का ऐलान
गोपाल कांडा ने हरियाणा लोकहित पार्टी के नाम से अपना सियासी दल बना रखा है। 2019 के विधानसभा चुनाव में कांडा ने सिरसा विधानसभा सीट से अपनी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों में किसी को बहुमत नहीं मिलता दिख रहा था और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही थी। ऐसे में कांडा ने बिना शर्त बीजेपी को समर्थन का ऐलान किया था। बीजेपी को 40 सीटें ही मिली थीं और ऐसे में एक-एक विधायक का समर्थन पार्टी के लिए अहम था। यही नहीं गोपाल कांडा ने 2022 के राज्यसभा चुनाव में कार्तिकेय शर्मा की जीत का रास्ता भी खोला था। कांडा ने निर्दलीय कैंडिडेट कार्तिकेय को समर्थन दिया था। बीजेपी भी कांग्रेस के दिग्गज अजय माकन को पटखनी देने के लिए कार्तिकेय शर्मा का समर्थन कर रही थी। कांडा ने तब कहा था कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जिसे भी वोट देने के लिए कहेंगे हमारी पार्टी उसी को वोट देगी।

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