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68 हजार सैनिक, 90 टैंक-तोप, ऐसे हुई थी गलवान के बाद तैनाती, सोमवार को होनी है कोर कमांडर स्तर की मीटिंग

ईस्टर्न लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तीन साल से ज्यादा वक्त से भारत और चीन के बीच गतिरोध बना हुआ है। गलवान में हुई खूनी झड़प के बाद सैनिकों की तैनाती तेजी से बढ़ाई गई और अब भी दोनों तरफ से तैनाती में कोई कमी नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक इस वक्त भी ईस्टर्न लद्दाख में 68 हजार से ज्यादा सैनिक, 90 टैंक और आर्टिलरी गन, 330 से ज्यादा बीएमपी मौजूद हैं। सोमवार यानी 14 अगस्त को भारत और चीन की सेना के बीच कोर कमांडर स्तर की 19 वें दौर की बातचीत होनी है। इसमें डेपसांग और डेमचॉक में सैनिकों को पीछे करने के लिए सहमति बनाने की कोशिश होगी।

क्या और कैसे पहुंचाया
इंडियन एयरफोर्स सूत्रों के मुताबिक गलवान की खूनी झड़प के बाद पहली प्राथमिकता थी कि ईस्टर्न लद्दाख में जल्द से जल्द सैनिक और हथियार पहुंचाए जाएं। इसके लिए एयरफोर्स ने सैनिकों सहित करीब 9000 टन का लोड एयरलिफ्ट कर वहां फॉरवर्ड एरिया में पहुंचाया।

सूत्रों के मुताबिक गलवान के तुरंत बाद 68 हजार भारतीय सैनिकों को एयरफोर्स के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए फॉरवर्ड लोकेशन में मूव किया गया। साथ ही 330 बीएमपी (इंफ्रेंट्री वीइकल), 90 टैंक और आर्टिलरी गन के अलावा सैनिकों के लिए एक्सट्रीम क्लोदिंग से लेकर राशन की सप्लाई की गई। सैनिकों को सिर्फ वहां पहुंचाना ही नहीं था बल्कि उनके वहां सुरक्षित रहने के लिए भी जरूरी चीजें भी पहुंचानी थी। हाई एल्टीट्यूट में पेलोड कैपिसिटी कम हो जाती है यानी क्षमता से कम वजन ही एयरक्राफ्ट उठा पाता है। एक शॉर्टी (यानी एक उड़ान) में ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट करीब 40 टन तक वजन ले जा सकता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गलवान के तुरंत बाद 9000 टन लोड के लिए इंडियन एयरफोर्स के एयरक्राफ्ट ने कितनी उड़ानें भरी।

ऑपरेशनल रेडी एयरक्राफ्ट से लेकर कॉम्बेट पेट्रोलिंग तक
सूत्रों के मुताबिक अभी भी वहां एयरफोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट मिग-29 और सुखोई-30 रेगुलर ऑपरेशन कर रहे हैं। गलवान के बाद सबसे पहले वहां राफेल, सुखोई और मिग-29 भेजे गए। फाइटर एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल इंटेलिजेंस गेदरिंग और सर्विलांस (नजर रखने) के लिए भी किया गया। इसके लिए फाइटर एयरक्राफ्ट सुखोई-30 और जगुवार तैनात किए गए।

एयरफोर्स ने फाइटर एयरक्राफ्ट को ऑपरेशन रेडी प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल किया। इसमें एयरक्राफ्ट फुली लोडेड होता है। यानी पूरे वेपन सिस्टम और फ्यूल के साथ उड़ान भरने के लिए एकदम तैयार। साथ ही पायलट भी हर वक्त रेडी होते हैं। जैसे ही कोई ऐसी सूचना मिले कि दुश्मन का फाइटर उड़ान भरने वाला है तो तुरंत यह फाइटर एयरक्राफ्ट भी उड़ान भरने के लिए तैयार रहते हैँ। ऑपरेशन रेडी होने पर भी एयरक्राफ्ट को उड़ान भरने में 5 से 7 मिनट का वक्त लगता है इसलिए गलवान के बाद लंबे वक्त तक एयरफोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट ने कॉम्बेट एयर पेट्रोलिंग भी की। इसमें फाइटर एयरक्राफ्ट लगातार उड़ान भरते हैं और यह भारत की तरफ से फॉरवर्ड एरिया में ऑफेंसिव पॉश्चरिंग (आक्रामक तेवर) थी।रडार से लेकर गाइडेड वेपन तक
एयरफोर्स के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ने एयरफोर्स के एसेट्स भी फॉरवर्ड एरिया में पहुंचाए। उस वक्त फॉरवर्ड एरिया में रडार तैनात करना बेहद जरूरी था ताकि एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत किया जा सके, साथ ही सर्फेस टू एयर (सतह से हवा में मार करने वाला) गाइडेड वेपन सिस्टम भी फॉरवर्ड एरिया में पहुंचाया गया। सर्फेस टू एयर गाइडेड वेपन शॉर्ट रेंज से लेकर 100 किलोमीटर तक की रेंज वाले हैं। वहां सर्विलांस के लिए रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) भी तैनात किए गए।

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