सूरज पर ISRO कौन-सा रहस्य खोजने वाला है? पूर्व साइंटिस्ट नंबी नारायणन ने बताया मिशन का असली मकसद
चांद के बाद ISRO सूरज पर क्या खोजने वाला है? बीते कुछ घंटों से यह सवाल हर देशवासी के मन में चल रहा है। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने इस सवाल का साफ-साफ जवाब दिया है। इस जवाब को जानने के बाद आपका सारा कन्फ्यूजन दूर हो जाएगा। वैज्ञानिक नंबी नारायणन का कहना है कि ‘यह एक स्टडी प्रोजेक्ट है, इसरो 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर सूर्य का अध्ययन करने जा रहे हैं। यह एक अच्छा प्रोजेक्ट है।’ इससे साफ है कि इसरो सूर्य का गहराई से अध्ययन करेगा, इस दौरान सूर्य से जुड़े उन रहस्यों से भी पर्दा उठेगा, जिन्हें मानव प्रजातियां कई सदियों से जानना चाहता है। सूर्य की स्टडी के लिए यह पहला भारतीय मिशन होगा।
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी पर इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने कहा, ‘यह एक अच्छी स्थिति है क्योंकि जब निजी कंपनी सामने आएंगे तो उन्हें फंडिंग ढूंढनी होगी। आपको सरकार से फंडिंग नहीं लेनी पड़ेगी। मुझे लगता है कि करदाताओं से हमेशा के लिए टैक्स नहीं लिया जाना चाहिए, हमें विभिन्न एजेंसियों से पैसा इकट्ठा करना चाहिए जो इसमें अपना फायदा देखती हों।’
इससे पहले नंबी नारायण ने कहा है कि ‘पहले की सरकारों को इसरो पर भरोसा नहीं था, यही वजह है कि भारतीय स्पेस एजेंसी को पर्याप्त मात्रा में बजट नहीं दिया जाता था।’ इसरो के शुरुआती दिनों के बारे में बात करते हुए नंबी नारायण का एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो बीजेपी ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया है। वीडियो में पूर्व इसरो वैज्ञानिक ये कहते दिखाई दे रहे हैं कि ‘सरकारों ने इसरो को तब फंड दिया जब इसने अपनी साख स्थापित कर ली।’
कब लॉन्च होगा मिशन?
इसरो चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बाद अब सूर्य को करीब से जानने के लिए 2 सितंबर को सुबह 11.50 बजे देश की पहली अंतरिक्ष-आधारित वेधशाला ‘आदित्य-एल1’ लॉन्च करेगा। इसरो ने कहा कि आदित्य-एल1 को भारतीय रॉकेट पीएसएलवी-एक्सएल द्वारा ले जाया जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र की गैलरी से प्रक्षेपण देखने के लिए आम लोगों को पंजीकरण करने के लिए आमंत्रित किया है।



