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काश! तुम खामोश नहीं रहते मेरे बेटे, फिर हम रेबीज से लड़ जाते, पापा से डर कैसा?

मेरे बेटे शाहवेज, आज तुम्हारा पापा टूटा हुआ है। अम्मी की हालत भी खराब है। तुम्हारी मौत के बाद दादा मतलूब भी बेबस हैं। लोग कहते हैं कि बाप के लिए सबसे बुरा दिन होता है, बेटे के जनाजे को कांधा देना। तुमने तो मेरी बांहों में दम तोड़ दिया है। जब तुम तड़प रहे थे, मैं भी पल-पल तुम्हारे साथ मर रहा था। फर्क सिर्फ इतना है कि तुम दुनिया से चले गए और मैं तुम्हारे दर्द के साथ जिंदा हूं। बेबस और लाचार। जिंदगी मेरा इतना बुरा इम्तहान लेगी उम्मीद नहीं थी। तुम्हारी तड़प और मौत के लिए किसे जिम्मेदार बताऊं। उस कुत्ते का, जिसने तुम्हें काट लिया था या उस पड़ोसी को, जिसने उसे बेलगाम छोड़ दिया था। काश! तुमने मुझे पहले ही बता दिया होता तो यह दिन देखने नहीं पड़ते।

एक सितंबर को जब तुमने पानी से डरना शुरू किया था, तब भी हम अनजान ही थे। कुत्ते से मिले खरोंच पर एक महीने तक मरहम लगाते रहे, पापा को क्यों नहीं बताया? दादा मतलूब भी अफसोस कर रहे हैं कि डेढ़ महीने पहले तुम्हें पड़ोस वाली आंटी के कुत्ते ने काटा था, मगर उन्हें तुमने उस समय बताया, जब एक खरोंच नासूर बन गया। तुम मुझे नहीं बताते, मगर अपनी अम्मी और दादा को पहले बता सकते थे। तुम तो दर्द से कराह रहे थे। कई डॉक्टरों ने इलाज से इनकार किया, फिर भी मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी। जब जीटीबी के डॉक्टरों ने बताया कि रैबीज तुम्हारे सिर तक पहुंच चुका है, मैं लाचार महसूस करने लगा। एम्स में जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े किए तो मैं टूट ही गया। रैबीज का इन्फेक्शन का असर देख समझ में नहीं आ रहा था कि हम क्या करें? अपने ही लार से लथपथ मेरा बेटा शाहवेज ऐसी हालत में दिखेगा, कभी सोचा नहीं था। कुत्ते की तरह भौंक रहे थे। जब खाना-पीना छोड़ा, तब हमारा दिल ही बैठ गया। ऊपरवाला यह दिन किसी बाप को न दिखाए।

मुझे पता था कि कुत्ता काटने के 24 घंटे के भीतर रेबीज का इंजेक्शन लगाना चाहिए। रेबीज का इन्फेकशन जब दिमाग तक पहुंच जाता है तो एन्सेफलाइटिस हो जाता है। मगर तुम्हारी खामोशी ने हमें बेबस बना दिया। मेरे बच्चे, शायद तुम डर गए थे कि हम तुम्हें डांटते। डांट के डर से तुमने अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। डेढ़ महीने तक तुम अपने जख्म पर मरहम लगा रहे थे। यह तुम्हारी मासूमियत थी मगर डरे क्यों? मैंने तो तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश की थी। तुमने जो मांगा, वह दिया। तुम्हारी अम्मी ने तो तुम्हारी हर जिद पूरी की है। तुम तो दादा के जिगर के टुकड़े थे। फिर यह जानलेवा डर क्यों ? इस डर से अब मैं खुद को गुनहगार महसूस कर रहा हूं। शायद इस घटना से वे लोग सबक लेंगे, जिनके बच्चे अपने दिल का हाल बताने से डरते हैं। तुम अपना जख्म दिखा देते तो रेबीज तुम्हें हमसे इस बेरहमी से नहीं छीन पाता।

शाहवेज, तुमने आखिरी सांस मेरे गोद में ली। एंबुलेंस में मैंने अपने लाडले को संभालने की भरसक कोशिश की। आखिरी दम तक तुम दर्द से परेशान थे, मगर तुम्हारी आंखों में जीने की तड़प भी थी। मैं सब देख रहा था मगर पूरी तरह से टूट चुके बाप के पास कोई ऑप्शन नहीं था। डॉक्टरों ने रेबीज इंफेक्शन को लाइलाज बताकर हाथ खड़े किए तो मैं बुलंदशहर के वैद्य के पास गया। मगर देर हो चुकी थी। रेबीज का इंफेक्शन लाइलाज है, फिर भी भरोसा नहीं था। अब तुम दुनिया में नहीं हो। घर में सन्नाटा पसरा है। लोग हमें ढांढस दे रहे हैं, कहते हैं कि ऊपर वाले को शायद यही मंजूर था। मगर दिल में एक कसक रह गई है कि काश! तुम अपने पापा से अपना हाल शेयर करते ..तो मेरा लाडला मेरे साथ होता।

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