कभी हिंदू, कभी हिंदी…ये विरोध नहीं नफरत है, क्या ऐसे चलेगी I.N.D.I.A. की ‘मोहब्बत की दुकान’?
विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. की सबसे बड़ी पार्टी और उसके नेता राहुल गांधी ‘मोहब्बत की दुकान’ की बात करते हैं। लेकिन गठबंधन के ही नेता कभी सनातन (Sanatan Dharm controversy) के नाम पर हिंदू का विरोध कर रहे तो कभी सियासत के नाम पर हिंदी का विरोध। आखिर ये कैसी ‘मोहब्बत की दुकान’ है? लोकतंत्र में विरोध और अपनी बात रखने का सबको हक है लेकिन विरोध के नाम पर नफरत फैलाने का हक तो बिल्कुल नहीं है। किसी धर्म को जड़ से मिटाने का आह्वान (call to eradicate Sanatan Dharm), उसकी तुलना एचआईवी वायरस और खतरनाक बीमारियों से करना (Comparing Sanatan with dengue, HIV) आखिर नफरत नहीं तो और क्या है? सरकारी कॉलेज में स्टूडेंट से ‘सनातन का विरोध’ करने के लिए कहना क्या मोहब्बत है? क्या I.N.D.I.A. गठबंधन के नेता ऐसे ही शब्द किसी भी अन्य धर्म, मत या संप्रदाय के लिए इस्तेमाल करने का दुस्साहस दिखा सकते हैं? हद तो ये है कि हिंदी दिवस (Hindi Diwas news) पर राजभाषा के साथ सभी भारतीय भाषाओं को सशक्त करने के आह्वान में भी सनातन धर्म के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने वालों को ‘हिंदी थोपना’ नजर आ रहा। हो सकता है कि हिंदू और हिंदी के विरोध की सियासत कुछ पार्टियों को रास आए लेकिन I.N.D.I.A. को इससे नुकसान ही होगा। बीजेपी भी इस मुद्दे पर आक्रामक है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश की रैली में साफ कर दिया कि लोकसभा चुनाव में ‘सनातन विवाद’ एक बड़ा मुद्दा रहने वाला है।
अब हिंदी दिवस पर गृह मंत्री के संदेश से उदयनिधि को दिक्कत
सनातन को मिटाने की बात करने वाले उदयनिधि स्टालिन अब वह हिंदी दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह के ‘हिंदी प्रेम’ पर सवाल उठा रहे हैं। 14 सितंबर 1949 को संविधान में हिंदी को संघ यानी केंद्र सरकार की राजभाषा घोषित किया गया था। तभी से 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस बार हिंदी दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह ने एक संदेश जारी कर कहा कि हिंदी ने न कभी दूसरी भारतीय भाषाओं के साथ प्रतिस्पर्धा की है और न ही करेगी। कोई देश तभी मजबूत होकर उभर सकता है जब उसकी सभी भाषाएं मजबूत हों।
अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट किया,’ हिंदी दिवस के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देता हूं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की भाषाओं की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने का नाम ‘हिंदी’ है। स्वतंत्रता आन्दोलन से लेकर आजतक देश को एकसूत्र में बांधने में हिंदी की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। आइए, ‘हिंदी दिवस’ के अवसर पर राजभाषा हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं को सशक्त करने का संकल्प लें।’
हिंदी दिवस के मौके पर शाह के संदेश और ट्वीट में आखिर क्या आपत्तिजनक है? हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देने में आखिर क्या गलत है? लेकिन उदयनिधि स्टालिन को इससे भी दिक्कत है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करके पूछा कि हिंदी तमिलनाडु और केरल को कैसे एक सूत्र में पिरोएगी? तमिलनाडु में तमिल है, केरल में मलयालम है। स्टालिन ने अपने पोस्ट के साथ स्टॉप हिंदी इम्पोजिशन यानी हिंदी थोपना बंद करो का हैशटैग भी लगाया। वैसे तो ‘हिंदी विरोध’ डीएमके समेत दक्षिण की तमाम दूसरी पार्टियों की राजनीति का प्रमुख औजार रहा है। लेकिन कम से कम हिंदी दिवस पर तो विरोध से बच सकते थे, वह भी तब जब हिंदी के साथ-साथ बाकी भारतीय भाषाओं के विकास की बात कही गई हो।



