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देश हित में भारत-म्यांमार के बीच कंटीली दीवार खड़ी करना, असम को इससे क्या फायदा? पश्चिम बंगाल से है कनेक्शन!

सीमा पार से घुसपैठ हमारे लिए कितनी बड़ी चुनौती है, यह किसी से छिपा नहीं है। पाकिस्तान लगातार लाइन ऑफ कंट्रोल को पार करने की हिमाकत करता आया है। भारी सुरक्षा के बावजूद उसकी ओर से सैनिक सीजफायर तोड़ते हैं और आतंकवादी आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं। हालांकि हमारी सेना लगातार उन्हें मुंहतोड़ जवाब भी देती आई है। बांग्लादेश की सीमा से पश्चिम बंगाल दाखिल होने वाले लोगों की भी संख्या कम नहीं है। बड़ी संख्या में बांग्लादेशी पश्चिम बंगाल के अलावा देश के अलग-अलग कोनों में फैले हुए हैं। इनके पास भारत का पासपोर्ट, आधार कार्ड के साथ नागरिकता भी होती है। लेकिन इन दो के अलावा एक और बॉर्डर है जहां हाल की घुसपैठ ने चिंता बढ़ा दी है। भारत-म्यांमार बॉर्डर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अब दोनों देशों के बीच सुरक्षा बढ़ाने के साथ कंटीले तारों के बाड़ भी लगाए जाएंगे। बता दें कि पहले भारत- म्यांमार के बीच खुली सीमा थी, यानी लोग आसानी से आ-जा सकते थे। म्यांमार की भारत के 4 राज्यों से सीमा लगती है। तो क्या मोदी सरकार के इस कदम से असम में घुसपैठ कम होगी। जानिए क्यों अमित शाह के इस फैसले में असम का निहित जुड़ा हुआ है-

देश के हित में है भारत-म्यांमार के बीच दीवार खड़ी करना
शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम पुलिस कमांडो की पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया था। शाह ने इस दौरान एक महत्वूर्ण बात कही। परेड को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि पहले भारत और म्यांमार के बीच खुली सीमा थी, यानी लोग आसानी से आ-जा सकते थे। लेकिन अब नरेंद्र मोदी सरकार ने इस सीमा को सुरक्षित करने का फैसला किया है। हम बांग्लादेश की सीमा की तरह ही पूरी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाएंगे। ये बाड़ सीमा को पार करने से रोकेंगे। पहले भारत और म्यांमार के बीच एक समझौता था जिसके तहत सीमावर्ती इलाकों के लोग बिना वीजा के आ-जा सकते थे। लेकिन, अब सरकार इस समझौते पर फिर से बातचीत कर रही है और दोनों देशों के बीच यह खुली आवाजाही बंद करने वाली है। सरकार ने हाल ही में पूरी सीमा पर स्मार्ट जाली लगाने का काम शुरू किया है।

भारत-म्यांमार के बीच हुआ था 1970 में एग्रीमेंट
सीमा सुरक्षा बढ़ाने के लिए भारत, म्यांमार सीमा पर जाली लगाएगा और दोनों देशों के बीच खुली आवाजाही (FMR) बंद कर देगा। भारत और म्यांमार के बीच 1970 में एक समझौता हुआ था, जिसे भारत-म्यांमार फ्री मूवमेंट रिजाइम(FMR) कहा जाता है। इस समझौते के तहत, भारत और म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग बिना वीजा के एक-दूसरे के देश में आ-जा सकते थे। इस समझौते का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के बीच सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना था। 1970 के बाद से भारत सरकार लगातार इसे रिन्यू करा देती है। आखिरी बार 2016 में इस एग्रीमेंट को रिन्यू किया गया था।लेकिन, अब इसी को भारत सरकार बंद करा देगी। दोनों देशों की सीमा के बीच एक कंटीली दीवार होगी। बता दें कि दोनों देश लगभग 1600 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं। FMR के मुताबिक, दोनों ओर 25 किलोमीटर तक आने-जाने की सुविधा थी।

भारत सरकार की ओर से फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि इस वक्त सीमा पार म्यांमार से 600 से ज्यादा सैनिक भारत में भगकर आ गए हैं। सैनिक म्यांमार से लगती मिजोरम की सीमा से अंदर दाखिल हुए हैं और वहीं लांग्टलाई जिले के तुईसेंटलांग में असम राइफल्स के पास शरण ले रखी है। म्यांमार में सैनिकों के ठिकानों पर पश्चिमी म्यांमार राज्य के रखाइन में एक हथियारबंद विद्रोही गुट अराकन आर्मी (AA)के उग्रवादियों ने कब्जा कर लिया है। इसलिए सैनिक भारी मात्रा में भारत भाग रहे हैं। म्यांमार सरकार ने इन सैनिकों से भारत सरकार की ओर से अपने सैनिकों को वापस मांगा है। सैनिको के अलावा आतंकवादी, हथियारों और ड्रग्स के तस्करों की भी एंट्री इस आसान आवाजाही के चलते सरल हो गई थी।

असम के लिए क्यों जरूरी है सरकार का यह फैसला
असम में सीमा पार से घुसपैठ एक गंभीर समस्या है। यह समस्या कई वर्षों से असम के लिए एक चुनौती रही है। असम भी घुसपैठ की समस्या से जूझता आया है। असम की सीमा हालांकि म्यांमार से नहीं लगती। लेकिन उसे भी बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों से समस्या होती आई है। सीमा के पास वाले इलाकों में बांग्लादेशियों की बढ़ती संख्या का वहां के लोगों ने भी विरोध किया था। लोगों का कहना था कि असमिया संस्कृति नष्ट हो रही है। असम में म्यांमार से भले करीब न हो लेकिन, मिजोरम, मणिपुर से उसकी सीमा लगती है और म्यांमार से मिजोरम, मणिपुर दोनों की सीमाएं पास है। इस वजह से मणिपुर, मिजोरम के रास्ते म्यांमार से भागे लोग असम में अपनी गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। शाह का यह फैसला असम के हित का काम करेगा। NRC और CAA की इसलिए सबसे ज्यादा जरूरत असम के लिए बताई जाती है।

बंगाल जैसा हाल न हो जाए इसलिए लिया फैसला
अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि हम बांग्लादेश की सीमा की तरह ही पूरी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाएंगे। शाह का यह कहना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बंगाल के रास्ते पूरे भारत में बांग्लादेशी घुसपैठिए शरण ले चुके हैं। वह यहां आतंकवादी, तस्कर, गलत धंधों को अंजाम देते हैं। पश्चिम बंगाल में तो इन्होंने अपना बसेरा बनाने के साथ भारत के अलग-अलग हिस्सों में फैले हैं। हाल के महीनों में भारत की सुरक्षा जांच एजेंसियों ने दिल्ली, पुणे, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरू, चेन्नई, गुजारात सहित कई राज्यों से इनकी गिरफ्तारी भी हुई। बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठिए पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और प्रदेश के बड़े शहरों में रहते हैं। इनकी खास बत यह है कि ये लोग आम लोगों की भाषा और बोल-चाल को जल्दी अपनाकर काफी घुलमिल जाते हैं। अपने गैरकानूनी कामों को अंजाम देने के लिए इन्होंने भारत की नागरिकता के साथ हर प्रमाणपत्र मौजूद है। ऐसे में पहचान और भी मुश्किल हो जाती है।

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