सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को जनता के हित में बताते हुए दखल से किया इनकार.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को झारखंड सरकार की उस याचिका को बंद कर दिया, जिसमें उसने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें राज्य सरकार को त्योहारों के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। यह मामला रामनवमी जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान बिजली कटौती से जुड़ा था।
झारखंड हाईकोर्ट ने बीते वर्ष एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि धार्मिक अवसरों पर आम जनता को बिजली की समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए राज्य सरकार विशेष योजना बनाए। कोर्ट ने साफ कहा था कि इस तरह के अवसरों पर बिजली कटौती धार्मिक स्वतंत्रता और मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है।
राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और तर्क दिया कि बिजली व्यवस्था एक तकनीकी और प्रशासनिक मामला है, जिसमें अदालत को दखल नहीं देना चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि जब मामला जनता के अधिकारों से जुड़ा हो, तो न्यायालय को हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका बंद करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराया और कहा कि त्योहारों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति जनता का हक है, और इसे सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजनों में कोई भी बाधा नहीं आनी चाहिए, क्योंकि ये न केवल धार्मिक भावना से जुड़े होते हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द के प्रतीक भी हैं।
इस फैसले के बाद राज्य सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी धार्मिक आयोजन के दौरान बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो, ताकि जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जनता ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे आम लोगों के हक में एक मजबूत कदम बताया है।



