नीतीश की ‘बेचैन पॉलिटिक्स’ का खुला राज! 24 घंटे के अंदर लालू से 2 बार मिलने के पीछे का सच समझिए
बिहार के लोगों के लिए यह अबूझ पहेली बनी हुई है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार बार-बार लालू प्रसाद यादव से मिलने क्यों राबड़ी देवी के आवास पर पहुंच जा रहे हैं। अकड़ मिजाज नीतीश को इतना लाचार कभी किसी ने न देखा और न कभी सुना। जब विधानसभा में नीतीश की पार्टी को महज 43 सीटें मिलीं और 75 सीटों वाली भाजपा के रहमो करम से वे सीएम बने थे, तब भी नीतीश इतने लाचार कभी नहीं दिखे। हालांकि बीजेपी के नेता तब भी उन्हें अक्सर इस बात का एहसास कराते रहते थे कि वे बीजेपी की दया पर सीएम बने हैं। आरजेडी की अगुवाई वाले महागठबंधन के साथ आते ही नीतीश कुमार की बेचारगी बढ़ गई है। सियासी जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार एनडीए के साथ जब थे, तो वे कभी भी तनाव और बेचैनी में नहीं दिखते थे। जब से उन्होंने महागठबंधन के साथ सरकार बनाई है। उनकी स्थिति दूसरी हो गई है।
लालू से मिलने 24 घंटे में दो बार गए नीतीश
नीतीश कुमार हाल के दिनों में कुछ अधिक ही बेचैन दिखते रहे हैं। कभी पार्टी मीटिंग, कभी समीक्षा बैठक और कभी औचक निरीक्षण नीतीश कुमार करने लगे हैं। इतना ही नहीं, आश्चर्यजनक ढंग से लगातार दो बार वे लालू यादव से मिलने पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर भी गए। पहले दिन लालू से उनकी मुलाकात नहीं हुई। लालू उस दिन अपने बड़े बेटे मंत्री तेज प्रताप के साथ जू सफारी का आनंद लेने राजगीर चले गए थे। दूसरे दिन यानी सोमवार को कैबिनेट मीटिंग के बाद नीतीश दोबारा लालू से मिलने गए। इस बीच उन्होंने पार्टी नेताओं को चुनाव कार्यों के लिए रेस कर दिया है। पिछले दो महीने से नीतीश पार्टी के नेताओं के साथ बैठक करते रहे हैं। कभी सांसदों-विधायकों के साथ तो कभी पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों के नेताओं के साथ उनकी बैठक होती रही हैं। चुनाव की तैयारियों में कोई कमी न रह जाए, इसलिए उन्होंने प्रभारियों की सूची रद्द कर नई सूची बनाने का निर्देश दिया है।
नीतीश अपनी इमेज दुरुस्त करने में जुटे
नीतीश कुमार ने शायद ही अपने राजनीतिक करियर में इतनी सक्रियता कभी दिखाई हो, जितनी सक्रियता अभी इसमें दिख रही है। वे कब किधर निकल जाएं, कहना मुश्किल है। इसकी पूर्व सूचना भी किसी को नहीं होती। पहले दिन लालू से मिलने वे राबड़ी देवी के आवास पर अचानक चले गए। उससे पहले भी जेडीयू दफ्तर में उनका पहुंचना भी औचक ही था। अपने पैतृक आवास बख्तियारपुर भी वे अचानक ही पहुंचे। परिजनों से भेंट-मुलाकात की। नीतीश सरकारी दफ्तरों का भी औचक निरीक्षण करने लगे हैं। लगता है कि वे अपनी नई छवि गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। नीतीश कुमार लोगों को ये दिखाना चाह रहे हैं कि वे अपने सुशासन के वादे पर हमेशा खरे उतरते रहे हैं। वे इस सरकार में भी उसे पूरी तरह से लागू किए हुए हैं। नीतीश कुमार हाल के दिनों में एक्स्ट्रा एक्शन में दिख रहे हैं। इसे लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
लालू से मिलने की हड़बड़ी क्यों है नीतीश को
चर्चा है कि लोकसभा चुनाव के लिए बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर नीतीश हड़बड़ी में हैं। विपक्षी गठबंधन की चार बैठकों के बावजूद इस बारे में कोई चर्चा नहीं हो रही है। नीतीश कुमार को बीजेपी के साथ रहते साल 2019 के लोकसभा चुनाव में 17 सीटों की हिस्सेदारी मिली थी। उनमें जेडीयू ने 16 पर जीत भी हासिल कर ली थी। हालांकि भाजपा को जेडीयू से दोस्ती की महंगी कीमत चुकानी पड़ी। भाजपा को अपने पांच सिटिंग सांसदों के टिकट काटने पड़े। नीतीश ने दावा किया था कि उनके सिटिंग सांसद भले दो हैं, पर विधानसभा में उनके सदस्यों की संख्या भाजपा से ज्यादा है। इसलिए वे बिहार में बड़ा भाई बन कर रहेंगे। आखिरकार विधायकों की अधिक संख्या के आधार पर उन्होंने बीजेपी से बारगेन कर उसके बराबर 17 सीटें हथिया ली थीं। जानकार बताते हैं कि सीट शेयरिंग का मामला महागठबंधन के बीच फंस सकता है।
महागठबंधन में फंस रहा सीट शेयरिंग का पेंच
भाजपा के साथ नीतीश ने जो सलूक 2019 में किया था, इस बार आरजेडी उसकी ही पुनरावृत्ति करना चाहता है। आरजेडी का कहना है कि विधानसभा में उसके सर्वाधिक सदस्य हैं। आरजेडी के मुकाबले जेडीयू विधायक तकरीबन आधे हैं। विधानसभा में सदस्यों की संख्या के आधार पर ही टिकट का बंटवारा होना चाहिए। नीतीश कुमार की पार्टी इस मामले में कमजोर पड़ रही है। नीतीश कुमार की चिंता है कि उनके 16 सिटिंग सांसद हैं तो उनकी हिस्सेदारी उससे कम नहीं होनी चाहिए। आरजेडी का तो लोकसभा में कोई सदस्य ही नहीं है। आरजेडी ने अभी तक अपना पत्ता नहीं खोला है। इसी वजह से नीतीश की बेचैनी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वे लालू के घर का चक्कर लगाने लगे हैं। वे जल्दी सीट बंटवारे का पेंच सुलझाना चाहते हैं। सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन के अंदर अभी से बेचैनी बढ़ गई है।



