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ग्लोबल चुनौतियां आंख दिखा रहीं, पर विश्व बैंक को भारत के विकास पर

दुनिया भर का आर्थिक माहौल भले ही चुनौती भरा दिख रहा हो, भारत इसमें लगातार दमखम दिखा रहा है। विश्व बैंक का अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3% होगी। एशियन डिवेलपमेंट बैंक ने भी इसी ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया है। रिजर्व बैंक के मुताबिक ग्रोथ रेट 6.5 पर्सेंट रहने का अनुमान है। विश्व बैंक के इंडिया डिवेलपमेंट अपडेट ने मंगलवार को ताजा आंकड़े जारी किए।

इसके मुताबिक, भारत पिछले वित्त वर्ष में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक था। तब 7.2% ग्रोथ के साथ भारत की विकास दर जी20 देशों में दूसरी सबसे ऊंची थी। यह दूसरी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के औसत से लगभग दोगुनी थी। अब मौजूदा वित्त वर्ष में 6.3% की आस में जो नरमी आ रही है, उसकी वजह एक तो बाहरी हालात हैं, दूसरे डिमांड में जो अचानक तेजी आई थी, जो अब थोड़ी मद्धम हो रही है।

अपडेट के मुताबिक, दुनिया भर में प्रतिकूल परिस्थितियां बनी रहेंगी और इनमें तेजी आएगी। ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी। राजनीतिक तनाव कायम रहेंगे। ग्लोबल डिमांड सुस्त रहेगी। इस बीच दुनिया का आर्थिक विकास भी मध्यम अवधि में धीमा होना तय है। इसके मुकाबले भारत की विकास दर में इस दमखम की कई वजहें हैं। घरेलू बाजार में डिमांड मजबूत है। सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही है। फाइनैंशल सेक्टर मजबूत हो रहा है। बैंक लोन में बढ़ोतरी से इस बात की तस्दीक होती है। इस वित्त वर्ष की की पहली तिमाही में यह बढ़कर 15.8% हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 13.3% थी। सर्विस सेक्टर में 7.4% की ग्रोथ के साथ मजबूती बने रहने की उम्मीद है। निवेश में बढ़ोतरी भी 8.9% पर मजबूत रहने का अनुमान है।

भारत में विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे टानो कौमे ने कहा, दुनिया का प्रतिकूल माहौल फिलहाल चुनौतियां पैदा करता रहेगा। लेकिन सरकारी खर्च के कारण निजी निवेश का माहौल बनेगा, जिससे भारत अवसरों को भुनाने में सक्षम होगा और बेहतर ग्रोथ हासिल करेगा। वर्ल्ड बैंक के सीनियर इकॉनमिस्ट ध्रुव शर्मा ने कहा कि महंगाई थोड़े समय के लिए खपत पर असर डाल सकती है, लेकिन निजी निवेश के लिए उचित माहौल बना रहेगा।

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