अखिलेश की राह पर चलेंगे तेजस्वी यादव या बिखर जाएगा I.N.D.I.A? लालू की RJD पर भारी ना पड़ जाए ये सियासी चाल
बिहार-यूपी के लोगों के बारे में डीएमके ( DMK ) सांसद दयानिधि मारन के बयान पर बिहार की राजनीति में कोहराम मचा हुआ है। आरजेडी, कांग्रेस, जेडीयू और समाजवादी पार्टी की तरह डीएमके भी विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A का हिस्सा है। कांग्रेस खामोश है। जेडीयू ने चुप्पी साध ली है, लेकिन बिहार के डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव ने ऐसे बयान की आलोचना की है। हालांकि इससे भी बड़ा विवादास्पद बयान तेजस्वी की पार्टी आरजेडी कोटे से नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में शामिल चंद्रशेखर ने जब बयान दिया था या यूं कहें कि अक्सर बोलते रहते हैं तो तेजस्वी की बोलती बंद रही। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को भी अब ऐसे बयानों को लेकर समझ आ गई है। उन्होंने अपनी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के हिन्दू आस्था को चोट पहुंचाने वाले बयान से परहेज करने की नसीहत दे दी है। अखिलेश ने पार्टी के दूसरे नेताओं को भी ऐसे बयान से बचने की सलाह दी है।
ब्राह्मणों को अखिलेश यादव ने आश्वस्त किया
दरअसल, समाजवादी पार्टी कार्यालय में रविवार को ब्राह्मण महापंचायत बुलाई गई थी। अखिलेश यादव पंचायत में उपस्थित थे। विपक्षी तेवर में उन्होंने भाजपा को तो निशाने पर लिया ही, अपने बड़बोले नेताओं को हिन्दू आस्था पर प्रहार करने वाले बयान से बचने की सलाह भी दे डाली। ब्राह्मण समाज के लोगों ने अखिलेश यादव से यह शिकायत की कि उनके एक नेता राम और रामचरितमानस पर भड़काऊ बयान देते रहते हैं। ऐसे में ब्राह्मणों से सहयोग की अपेक्षा समाजवादी पार्टी कैसे कर सकती है। उसके बाद अखिलेश ने बिना नाम लिए पार्टी के उस नेता की टिप्पणी से असहमति जाहिर की। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजों पर समाजवादी पार्टी अंकुश लगाएगी। उन्होंने लगे हाथ पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को नहसीहत भी दे डाली कि वे किसी भी धर्म और जाति को लेकर के कोई विवादास्पद टिप्पणी करने से बचें।
यूपी में ब्राह्मणों आबादी 12 प्रतिशत से अधिक
उत्तर प्रदेश में सवर्ण जातियों की आबादी 18 से 20 प्रतिशत मानी जाती है। इसमें भी सबसे ज्यादा आबादी ब्राह्मणों की 12 से 14 प्रतिशत के करीब है। ठाकुर यानी राजपूत आबादी राज्य की कुल आबादी में सात-आठ फीसदी हैं। ब्राह्मणों के बाद ओबीसी की सबसे ज्यादा संख्या वाली बिरादारी यादव है। उत्तर प्रदेश के तमाम दलों को यह पता है कि ब्राह्मण वोट किसी भी दल की नैया पार लगा सकते हैं। इसलिए समय-समय पर ब्राह्मणों को गोलबंद करने की कोशिश सभी पार्टियां करती रही हैं। मायावती ने ब्राह्मणों को ध्यान में रख कर ही सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला बनाया था। ब्राह्मण पहले कांग्रेस के सपोर्टर हुआ करते थे। अब ये भाजपा के साथ हैं। मायावती ने इन्हें साथ लेकर आखिरी बार यूपी की सत्ता भी संभाली थी। यही वजह है कि यूपी में ब्राह्मण राजनीतिक दलों की पहली पसंद बनते रहें।



