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बिहार की सियासत में उठ रहे कई सवाल! सीएम नीतीश की खामोशी में छिपा है उनके अगले कदम का राज

बिहार में महागठबंधन के नेता आपस में कभी-कभी ऐसे उलझने लगते हैं, जिससे लगता है कि सरकार अब नहीं बचेगी। महागठबंधन में फिलहाल 6 दल शामिल हैं, लेकिन घमासान जब भी मचता है तो उसमें आरजेडी और जेडीयू के दूसरे-तीसरे दर्जे के नेता-प्रवक्ता ही अधिक बोलते हैं। उनके बोल-बयान से सब धोखा खा जाते हैं। धोखा की बात इसलिए कि ऐसे वक्त में दोनों दलों के शीर्ष नेता या तो चुप रहते हैं या कभी बोल भी दिए तो उसमें गिला-शिकवा या खतरे की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती।

नीतीश खामोश, पर तेजस्वी ने कहा- ऑल इज वेल

तेजस्वी यादव के खिलाफ सीबीआई ने हाल ही में चार्जशीट दाखिल की है। इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कोई कह रहा कि महागठबंधन अंतिम सांसें ले रहा है। सीएम नीतीश कुमार की खामोशी को विपक्ष इसका संकेत बताता है। डेप्युटी सीएम और आरजेडी के सीनियर लीडर तेजस्वी तो सीबीआई-ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों को चुनौती ही देते रहते हैं। वे अक्सर कहते हैं कि हम लोगों को केंद्रीय एजेंसियों के छापे, केस और चार्जशीट की अब आदत पड़ गई है। चार्जशीट को लेकर नीतीश की चुप्पी पर उड़ रही कई तरह की अफवाहों पर तेजस्वी ने विदेश दौरे से लौटते ही यह कह कर विराम लगा दिया कि नीतीश जी हमारे सीएम हैं और रहेंगे। उनके नेतृत्व में महागठबंधन अटूट है। हमारा मकसद बीजेपी को सत्ता से बेदखल करना है और इस दिशा में हम लोग आगे भी बढ़ रहे हैं। उसके बाद महागठबंधन के उन नेताओं की बोलती बंद हो गई है, जो कल तक नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर सवाल उठा कर ऐसी तनातनी की स्थिति पैदा किए हुए थे, जिससे लगता था कि सरकार अब गई, तब गई।

अटकलें इसलिए कि आरजेडी-जेडीयू के नेता उलझे हैं

सवाल उठता है कि क्या नीतीश कुमार ऐसे बयान सुन कर या मीडिया में आई खबरें पढ़ कर खुद को सहज महसूस करते होंगे ? या लालू-तेजस्वी अपने नेताओं की ओर से बार-बार नीतीश कुमार पर अंगुली उठाए जाने से खुश होते होंगे ? अगर यह दोनों दलों के आला नेताओं को अच्छा नहीं लगता होगा तो फिर दोनों दलों के नेता क्यों ऐसी स्थिति समय-समय पर पैदा करते हैं ? शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के ताजा विवाद पर जिस तरह आरजेडी के नेता केके पाठक के बहाने नीतीश कुमार पर हमलावर हुए, वैसा दो ही स्थिति में हो सकता है। अव्वल तो उनके दल के शीर्ष नेतृत्व की उन्हें हरी झंडी मिली हो या नेताओं पर नेतृत्व का कोई कंट्रोल नहीं रह गया है। महागठबंधन सरकार की अंतिम सांसें लेने या बेमेल गठजोड़ की बात कह कर विपक्ष के जो नेता इस खींचतान पर मजे ले रहे हैं, उनकी कल्पना या भविष्यवाणी का आधार भी सिर्फ यही है।

कुछ घटनाओं से झलका है आरजेडी-जेडीयू में तनाव

जाने-अनजाने कुछ ऐसी बातें भी हुई हैं, जो सरकार में खींचतान की ओर इशारा करती हैं। डेप्युटी सीएम के अलावा तेजस्वी यादव पर्यटन और स्वास्थ्य महकमे के भी मंत्री हैं। हाल में दो ऐसी घटनाएं हुईं, जो शिक्षा मंत्री और अपर मुख्य सचिव की खींचतान के थोड़ा आगे-पीछे की हैं। सबसे पहले स्वास्थ्य महकमे में लगभग 500 कर्मचारियों का ट्रांसफर तब हुआ, जब स्वास्थ मंत्री तेजस्वी देश से बाहर थे। संभव है, उन्होंने विदेश रवाना होने से पहले इसकी स्वीकृति दे दी हो। लेकिन यह संभावना तब खत्म हो गई, जब शाम को ट्रांसफर हुआ और सुबह उसे रद्द कर दिया गया। बताया गया कि तबादले में नियमों की अनदेखी की गई। दूसरी घटना राजगीर मलमास मेले में हुई। मलमास मेले के जो होर्डिंग-बैनर टंगे, उसमें सीएम समेत कई नेताओं की तस्वीर तो थी, लेकिन पर्यटन मंत्री तेजस्वी यादव की तस्वीर ही नदारद थी। शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और केके पाठक का विवाद तो एकदम ताजा है। इन्हीं कड़ियों को जोड़ कर महागठबंधन सरकार के दिन गिने जाने लगे।

नीतीश के पाला बदल की जताई जा रही आशंका

सरकार गिरने की अटकलें लगाने वाले यह भी बताते हैं कि इससे नीतीश कुमार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसलिए कि एनडीए से उनका पुराना याराना है और वे कभी भी एनडीए के साथ जा सकते हैं। एनडीए के साथ गए तब भी उनका सीएम बने रहना तय है। ऐसा कहने वाले तर्क देते हैं कि नीतीश कुमार अब पाला बदल के लिए अभ्यस्त हो गए हैं। उन्हें पता है कि कब किसके साथ सटना है या किसका साथ छोड़ कब हटना है। साल 2013 से 2022 तक नीतीश कुमार ने तीसरी बार पाला बदला है। साल 2013 में उन्होंने नरेंद्र मोदी के पीएम फेस बनाए जाने पर बीजेपी से रिश्ता तोड़ लिया था तो 2017 में तेजस्वी के खिलाफ सीबीई केस होने पर आरजेडी का साथ छोड़ दिया था। साल 2022 में फिर बीजेपी का साथ छोड़ा और कभी भी आरजेडी से अलग न होने की शपथ के साथ उन्होंने महागठबंधन का नेतृत्व कबूल किया। उनके इसी पाला बदल के कौशल से बीजेपी और आरजेडी के नेता हमेशा सशंकित रहते हैं। लालू यादव ने उनके इस कला-कौशल को देखते हुए उनका नामकरण ही पलटूराम कर दिया था।

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