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कभी मजबूरी में बनी, आज दिलों पर राज करती हैं ‘टू-मिनट मैगी’, नाम के पीछे भी दिलचस्प है कहानी

2 मिनट में बनने वाली आपकी मैगी (Maggi), जो भले दो मिनट में नहीं बनती, लेकिन आपके-हमारे, हम सबके के दिल के बेहद करीब है। आज हर किचन में दिखने वाला वो पीला पैकेट किसी पहचान का मोहताज नहीं है। टू मिनट नूडल्स के पैकेज बच्चों से लेकर बुजुर्गों को भी खूब पसंद है। हॉस्टल ब्वॉज की तो मानों ये लाइफलाइन हो। रसोई में मैगी का पैकेट खुला नहीं कि बच्चे प्लेट का इंतजार करने लगते हैं। खाना भले न बनाना आए, मैगी आपको भूखा नहीं रहने देती। इतना पढ़ने के बाद ही आपके मुंह में पानी आ गया होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मैगी का जन्म कैसे हुआ? इसे मैगी का नाम कैसे मिले? कई बार विवादों में आने के बाद भी क्यों ये करोड़ों दिलों पर राज करता हैं? आज कहानी उसी मैगी की…

​मजबूरी में हुई थी शुरुआत

मैगी की कहानी साल 1897 में शुरू हुई थी। सबसे पहले जर्मनी में मैगी नूडल्स पेश किया गया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि आपकी फेवरेट मैगी का जन्म मजबूरी में हुआ था। 1972 में स्विट्जरलैंड में इंडस्ट्रियल क्रांति का दौर था। महिलाएं फैक्ट्री में काम करने लगी थीं। घर और बाहर काम करना मुश्किल हो रहा था। जूलियस माइकल जोहानस मैगी ने जब महिलाओं की इस परेशानी को देखा तो उन्होंने आटे से बनी चीजों को बेचना शुरू किया। लेकिन उनका ये बिजनेस कुछ खास चला नहीं था। इसके बाद साल 1897 में उन्होंने ऐसे खाद्य पदार्थ बनाना शुरू किया, जो जल्दी से पक जाए। ऐसा इसलिए ताकि महिलाओं का खाना बनाने का वक्त बच सके। इसी के साथ मैगी की शुरुआत हुई थी। महिलाओं की परेशानी को भांपते हुए जूलियस ने 1897 में मैगी नूडल्स की शुरुआत की।

जूलियस का पूरा नाम जूलियस माइकल जोहानस मैगी था। उन्होंने अपने सरनेम पर कंपनी का नाम मैगी रखा। साल 1947 में Maggi का नेस्ले के साथ विलय हुआ था, जिसके बाद से अब तक मैगी नेस्ले की सबसे ज्यादा सेलिंग प्रोडक्ट बनी हुई है। भारत में मैगी की एंट्री 39 साल पहले साल 1984 में हुई। नेस्‍ले इंडिया लिमिटेड मैगी को भारत लेकर आई। जब नेस्ले मैगी को भारत लेकर आई, उसे भी अंदाजा नहीं था कि लोगों को वो इतना पसंद आएगा।

​विज्ञापनों पर खर्च शुरू​

मम्मी भूख लगी है मैगी, मैगी, मैगी… बस दो मिनट में मैगी जैसे विज्ञापन आपने भी देखें और सुने होंगे। जब भी किचन में मैगी बनता है ये जिंगल्स दिमाग में आ जाता है। शुरुआत में मैगी शहरी लोगों के नाश्ते का विकल्प था। लेकिन धीरे-धीरे यह नूडल्स घर-घर की रसोई में पहुंच गया। धीरे-धीरे बदलती लाइफस्टाइल के साथ खाने की आदतें बदली, 1991 के बाद आर्थिक उदारीकरण का फायदा मैगी को मिलने लगा। नेस्ले ने बिक्री और बाज़ार में हिस्सेदारी बढ़ाने लगी। समय के साथ मैगी बदलता भी रहा। अब मैगी न्यूडल्स के अलावा सूप, भुना मसाला, मैगी कप्पा मैनिया इंस्टैंट नूडल्स जैसे प्रोडक्ट बाजार में मौजूद हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि नेस्ले के कुल मुनाफे में मैगी ब्रांड की करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी है।

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