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दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों के बाहर ई-‘इरिटेटिंग’ रिक्शा, सड़कों पर पैर तक रखने की नहीं छोड़ते जगह

कनेक्टिविटी की समस्या को दूर करने के लिए दिल्ली में बड़े पैमाने पर ई-रिक्शों को प्रोत्साहन दिया गया, जिसकी वजह से मेट्रो स्टेशन के आसपास के इलाकों में लोगों की आवाजाही काफी आसान हो गई है। हालांकि पिछले कुछ समय के यही ई-रिक्शा यात्रियों के लिए सिर दर्द बन गए हैं। ज्यादा सवारियां लेने और अपना नंबर पहले लगाने के चक्कर में ये रास्ता घेरकर ही खड़े हो जाते हैं। कई बार लोगों की ई-रिक्शा ड्राइवरों से बहस भी हो जाती है। कई मेट्रो स्टेशनों पर ई-रिक्शों के लिए अलग लेन भी बनाई गईं, लेकिन फायदा नहीं हुआ। मेट्रो स्टेशनों के बाहर हालात का जायजा लिया एनबीटी संवाददाता राजेश पोद्दार, अभिषेक गौतम, सुदामा यादव और प्रशांत सोनी ने

इस इंटरचेंज स्टेशन पर डीएमआरसी ने यहां भी ई-रिक्शों को व्यवस्थित करने के लिए डेडिकेटेड लेन्स बनाई थीं, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। रियलिटी चेक में हमने पाया कि डेडिकेटेड लेन तो खाली पड़ी थी और ई-रिक्शे बाहर सड़क के एक किनारे खड़े हुए थे, जबकि सड़क के दूसरी ओर रेहड़ी पटरी वालों ने कब्जा किया हुआ था। ऐसे में सड़क पर केवल एक कार के निकलने जितनी जगह रह जाती है, जिससे ट्रैफिक पर असर पड़ता है। स्टेशन के दूसरे गेट पर भी ई-रिक्शा चालक अंदर आने-जाने का रास्ता घेरकर खड़े हुए थे, जिसके चलते लोगों को इनके बीच से जगह बनाकर निकलना पड़ रहा था। सड़क के दूसरी ओर पिंक लाइन के इंटरचेंज स्टेशन के बाहर भी रिक्शा चालक सड़क पर ही जगह घेरकर खड़े हुए थे। लोगों ने बताया कि शाम में नोएडा लिंक रोड से अंदर आते ही सड़क पर टर्न लेने तक की जगह नहीं बचती है और पूरा रास्ता ई-रिक्शा चालक घेरे रखते हैं।

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