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क्या फंसा हुआ है आपका भी फ्लैट? लाखों दुखी बायर्स के लिए आ रही है गुड न्यूज

घर का सपना हर किसी के लिए बेहद खास होता है। लोग अपनी जमापूंजी घर खरीदने में लगा देते हैं, लेकिन कई बार बिल्डर्स की गलतियों के कारण पूरा प्रोजेक्ट अटक जाता है और साथ ही अधर में लटक जाता है एक होम बायर्स का सपना और उसका भविष्य। जिस घर से लिए वो अपनी पूरी सेविंग लगा देता है, बैंक के कर्ज ले लेता हो, वो घर उसे कम मिलेगा, इसका कुछ पता नहीं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार की ओर से होमबायर्स के इस दर्द को दूर करने की कोशिश हो रही है। उन लोगों को राहत देने की कोशिश की जा रही है, जिनका फ्लैट, घर रुके हुए प्रोजेक्ट में फंस गया है। सरकार ने इस दिशा में कदम उठाया है। रियल एस्टेट की अटकी परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक्सपर्ट पैनल ने कई ऐसे सुझाव दिए हैं, जो इस समस्या का हल निकालने में मददगार साबित होंगे।

लाखों होम बायर्स को राहत

रियल एस्टेट की रुकी हुई परियोजनाओं के लिए बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी ने दिवाला कानून में बदलाव और असामान्य परिस्थितियों में भूमि-स्वामित्व अथॉरिटी के पेमेंट पर रोक लगाकर बिल्डर की फाइनेंशियल हालात को सुधारा जाए, ताकि वो अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कर सकें और होम बायर्स को उनका घर हैंडओवर किया जा सके। कमेटी के सुझाव को अगर मान लिया जाए तो देशभर में 4.5 लाख करोड़ रुपये के अटके हुए प्रोजेक्ट को पूरा करने में मदद मिल जाएगी। देश भर 4 लाख से अधिक अटके हुए प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सकेगा। लाखों घर खरीदारों का सपना पूरा हो सकेगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि अटके हुए बिल्डर प्रोजेक्ट में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट नोएडा, गुड़गांव में है। उसके बाद नंबर महाराष्ट्र का आता है।

कमेटी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दिवालिया और दिवालियापन जैसे मामलों में रियल एस्टेट कंपनी के आधार पर सामाधान निकालने से बेहतर हैं कि हम प्रोजेक्ट बेस हल निकालना चाहिए। ऐसा होने से किसी भी कंपनी के एक प्रोजेक्ट का सामाधान निकाला जा सकेगा, किसी कंपनी के भीतर एक परियोजना को समाधान के लिए लिया जा सकता है। ऐसा होने से कंपनी के बाकी प्रोजेक्ट प्रभावित नहीं होंगे।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अटके प्रोजेक्ट

इसके अलाव पैनल ने सुझाव दिया है कि दिवाला समाधान प्रक्रिया के दौरान लेनदारों को दी गई छूट का विस्तार उन घर खरीदारों तक नहीं होना चाहिए, जिनके पास अपने अपार्टमेंट, प्लॉट या विला का कब्जा है। सिर्फ नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे की बात करें तो यहां बिल्डरों पर 40 हजार करोड़ से अधिक का बकाया है। प्रीमियम, पेनेल्टी, इंटरेस्ट बकाया के चलते प्रोजेक्ट में देरी हो रही है, कई प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। नोएडा की परियोजनाओं के लिए, चार साल की मोहलत का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें से दो साल ओखला बर्ड सेंचुरी की वजह से काम रुकने की वजह से हुई देरी और दो साल कोविड के चलते काम रुका रहा।

तीन कैटेगरी में बांटकर निकाले हल

पैनल ने प्रोजेक्ट को तीन कैटेगरी में बांटकर हल निकालने पर जोर दिया है। पहली कैटेगरी ऐसे प्रोजेक्ट जहां काम नहीं शुरू हुआ, दूसरी कैटेगरी, जहां काम शुरू होने के बाद प्रोजेक्ट अटक गया, तीसरी कैटेगरी जहां बिल्डरों ने बिना रजिस्ट्री के घर खरीदारों को फ्लैट हैंडओवर कर दिया। पैनल ने स्टेट रेरा (RERA) को भी इस समस्या का हल निकालने के लिए साथ काम करने की सलाह दी है।

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