बाबर के खिलाफ हसन खान मेवाती के शौर्य और आजादी की लड़ाई में बलिदान की धरती मेवात को किसकी लगी नजर
दिल्ली-एनसीआर के 4 जिले सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहे हैं। 2 होमगार्ड समेत 5 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है। हिंसा और आगजनी में करोड़ों की संपत्ति भी स्वाहा हो चुकी है। 50 से अधिक सरकारी और निजी गाड़ियां फूंक दी गईं। 20 पुलिसवालों समेत कम से कम 30 लोग जख्मी हैं। हिंसा की शुरुआत सोमवार को दिल्ली से महज 80-85 किलोमीटर दूर मेवात क्षेत्र के नूंह (Nuh Violence news) से हुई। दोपहर में उपद्रवियों की भीड़ ने जलाभिषेक यात्रा पर हमला कर दिया। जलाभिषेक यात्रा पर पत्थरबाजी हुई। पेट्रोल बम फेंके गए। गोलियां चलाई गईं। लाठी-डंडों से भी हमले हुए। गाड़ियां आग के हवाले कर दी गईं। देखते ही देखते हिंसा की आग गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल पहुंच गई। सोशल मीडिया पर तेजे से फैले वीडियो और तस्वीरों ने आग में घी का काम किया। नूंह में कर्फ्यू लगा हुआ है। इंटरनेट बंद है। फरीदाबाद में इंटरनेट बंद है। गुरुग्राम में धारा 144 लगाया गया है। प्रशासन हालात को काबू में पाने की कोशिश कर रहा है। मेवात में इससे पहले तमाम धार्मिक यात्राएं, मजहबी जलसे शांति और सौहार्द के साथ निकलते थे। लेकिन नूंह को न जाने किसकी नजर लग गई। जिस मेवात (History of Mewat) की पहचान कभी देश के पहले शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद से होती थी, स्वतंत्रता संग्राम में मेव समुदाय के बलिदान से होती थी, बाबर के खिलाफ तनकर लड़ने वाले राजा हसन खान मेवाती के शौर्य से होती थी, आज वही मेवात हिंसा की आग में जल रहा है।
डरावना मंजर
सोमवार को लगातार तीसरे साल ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा निकली। यात्रा की शुरुआत गुरुग्राम के सिविल लाइंस से हुई। नूंह के नाल्हड़ शिव मंदिर में जलाभिषेक के बाद ये यात्रा पुन्हाना में आकर संपन्न होने वाली थी। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और मातृशक्ति दुर्गावाहिनी की तरफ से निकाली गई इस यात्रा में करीब 80 गाड़ियां और दोपहिया वाहन थे। करीब 2000 लोग इसमें शामिल थे। यात्रा नूंह के नाल्हड़ शिव मंदिर पहुंचने ही वाली थी कि अचानक 200 से 300 उपद्रवियों की भीड़ ने उस पर हमला कर दिया। पत्थर चलाने लगे। यात्रा में शामिल एक गाड़ी को फूंक दिया। उसके कुछ ही मिनटों में उपद्रवी पुलिस की गाड़ियों और एक स्कूल बस को भी आग के हवाले कर दिया। मौके पर जितने पुलिसवाले थे वे हिंसक भीड़ को काबू में करने के लिए नाकाफी थे। यात्रा में शामिल सैकड़ों लोग जान बचाने के लिए किसी तरह मंदिर में घुसे। अनिल मोहनिया नाम के एक स्थानीय रिपोर्टर ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘जैसे पेड़ से फल गिरते हैं, वैसे ही यात्रा में घायल लोग जमीन पर गिर रहे थे।’
क्यों भड़की हिंसा?
यात्रा से पहले ही मेवात की फिजा में तनाव था। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों की तरफ से भड़काऊ पोस्ट किए जा रहे थे। बजरंग दल के कार्यकर्ता और स्वयंभू गोरक्षा दल के नेता मोनू मानेसर ने एक दिन पहले ही सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर ऐलान किया था कि यात्रा में वह शामिल होगा। उसने लोगों से बड़ी तादाद में इस यात्रा में शामिल होने की अपील की थी। मानेसर इस साल फरवरी में जुनैद और नासिर नाम के 2 युवकों की हत्या मामले में आरोपी है। दोनों युवकों को एक गाड़ी में जिंदा जला दिया गया था और इस मामले में राजस्थान पुलिस को उसकी तलाश है। मोनू मानेसर के वीडियो के जवाब में सोशल मीडिया पर दूसरे पक्ष की तरफ से भड़काऊ पोस्ट किए जाने लगे। कुछ समूह धमकी देने लगे कि अगर यात्रा में मानेसर शामिल हुआ तो अंजाम ठीक नहीं होगा। पहले से तनाव के बावजूद पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती नहीं हुई। मानेसर यात्रा में शामिल नहीं हुआ लेकिन अफवाह फैल गई कि वह यात्रा में शामिल है। इसके बाद तनाव काफी बढ़ गया। पुलिस सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ये अफवाह फैल गई थी कि मानेसर भी काफिले में शामिल एक कार में सवार है और कुछ गाड़ियों में लोग लाठी-डंडे, तलवार वगैरह से लैस हैं। इसी अफवाह के बाद उपद्रवियों ने यात्रा पर हमला कर दिया।



